Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 60
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, verse 60 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
आपन्निमग्नमिममेवमकिंचनं त्वं मामुद्धरोद्धरणशील दयोदयेन ।
ये नाम केचन जगत्सु जयन्ति सन्तस्तत्संगमं परमशोकहरं वदन्ति ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
हे आपत्ति से उवारनेवाले भगवन्, इस तरह इन्द्रियों के कारण आपत्ति के सागर में डूबे हुए इस
मुझ अकिंचन शरणागत का आप दया करके उपदेश से उद्धार कीजिये, क्योकि इस संसार में
आपके जैसे जो कोई दयावान् बड़ तत्त्वज्ञानी रहते हैं उनकी शरणागति परमशोक नाशक होती है,
यों सभी शास्त्र तथा सभी लोग बतलाते है