Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 68 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
युक्तियुक्ते तयेत्युक्ते विद्याधर्या धरोरसि ।
बद्धपद्मासनोऽथाहं समाधाबुदितोऽभवम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : इस तरह उस पर्वत के ऊपर उस विद्याधरी के युक्तियुक्त वचन
कहने पर मैं पद्मासन लगाकर समाधि के लिए उद्यत हो गया