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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 24

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

अयमित्थमिहाज्ञानभ्रमः प्रौढोऽहमात्मकः । शाम्यति ज्ञानचर्चाभिः पश्याभ्यासविजृम्भितम् ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

जब अनादि अनन्त संस्राररुप अनर्थ भी ज्ञान के अभ्यास से नष्ट हो जाता हैं तब ऐसा कोन अनर्थ बचने पाता है जो अभ्यास से उसकी चिकित्सा न हो सके, यह कहती है / हे मुने, यह इस प्रकार का प्रौढ़ अहंरूप जो बड़ा अज्ञानभ्रम विद्यमान है, वह ज्ञान की चर्चा यानी श्रवणादि के अभ्यास से ही निवृत हो जाता है, भला देखिये तो सही अभ्यास का फल