Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 66, Verse 2

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 66, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 66 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

कथं शिलोदरे बाले त्वद्विधानां भवेत्स्थितिः । कथं संचलनं तत्र किमर्थं तत्र चास्पदम् ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

मैंने पूछा कि हे बाले, बिल्कुल अवकाश से रहित शिलापेट में तुम्हारे जैसे शरीरधारियों की स्थिति कैसे होगी, उसमें हिलना-डोलना कैसे होगा और उसमें घर से भी तुम्हें लाभ क्या होगा ? सारांश यह कि जहाँ प्रवेश ही असम्भव है वहाँ ये सब बातें हो ही नहीं सकती