Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 37
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, verse 37 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
न केवलमहं बद्धा यावद्भर्तापि तत्र मे ।
बद्धः सायंतने पद्मकुङ्मले षट्पदो यथा ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
अब किसकी रक्री हो' इत्यादि प्रश्नो का उत्तर देने के लिए उपक्रम करती हैं /
न केवल मैं ही ऐसी हूँ, किन्तु सब तरह से भरणपोषण करनेवाला मेरा पति भी उसमें उस
प्रकार बद्ध हो गया है, जिस प्रकार भ्रमर कमल की कली में