Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
विधिना तत्र बद्धास्मि वसाम्युपलयन्त्रके ।
अत्रासंख्या मुने याता मन्ये युगगणा मम ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, हमको नियति ने ही बाँध
दिया है, जिससे कि मैं उस पत्थर के यन्त्र में बस रही हू । मैं मानती हूँ कि इस प्रकार उस में रहते-
रहते मेरे असंख्य युगसमूह बीत चुके