Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 62 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
अथ राघव सा कान्ता मया कान्तानुषङ्गिणी ।
संविदं तन्मयीं कृत्वा पृष्टेदं दृश्यरूपिणी ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह अवान्तर प्रश्न का उत्तर देकर पूर्व में पूछी गयी कथा के शेष अंश को कहते हैं।
तदनन्तर हे राघव, कान्त में अनुरागवती उस दृश्यरूप कान्ता से - उसके अभिप्राय का विशेष
ज्ञान रखनेवाली संवित् का संकल्प करके-मैंने यह पूछा