Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 62 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
यथा स्वप्ने धराध्वादिपृष्ठव्यवहृतिर्नभः ।
तदा ह्यहं च त्वं सा च तदिदं च तथा नभः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे स्वप्न में पृथ्वी के ऊपर खेती आदि, रास्तों पर यातायात आदि तथा महल आदि
के ऊपर शयन आदि का जो व्यवहार होता है वह भी सब चिदाकाशरूप ही हे । वैसे ही उस समय
मैं, आप, वह स्त्री तथा वह और यह सब कुछ चिदाकाशरूप ही था