Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 62 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
यथैव तत्तथैवेदं तथैवेदं यथैव तत् ।
असत्सत्तामिव गते सच्चासदिव च स्थितम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे स्वप्नादि देहों की सत्ता है, वैसे ही यह
भी है, जैसे यह है, वैसे ही वह भी है । असत् यह जगत् सद्रूपता को मानों प्राप्त है तथा निर्विशेष
आत्मतत्त्वरूप जो सत् है वह भी आवृत होने के कारण असत्-सा - अत्यन्त अप्रसिद्ध सा-स्थित
है। इतना ही नहीं ओर सुनिये -चिदानन्दस्वभाव का जो व्यत्यास है (उलटफेर है) वह भी ऐसा ही
है