Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 41
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
सिकताः पीडिताः सत्यः स्रवन्ति स्नेहजं रसम् ।
शिलाफलककेभ्यश्च जायन्ते कमलान्यलम् ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी तरह हजारों असम्भावित वस्तुओं का अन्यत्र सम्भव है, यह कहते हैं ।
श्रीरामजी, कहीं पर तो कोल्हू में पीसे जाने पर बालू से भी स्नेहजनित रस यानी तेल
निकलता है और कहीं पर शिलाओं के ऊपरी हिस्सों में अनेक सुन्दर कमल उगते हैं