Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
विटपाकारमूलौघदर्शनाद्वज्रशोभिभिः ।
घूर्णते पत्रपुष्पाभैः पादपैर्व्योम्नि काननम् ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
इस ब्रह्माण्ड में ग्रभिद्ध जो अरण्य है, उसे विपरीत पत्र, पुष्प आदि से सम्पन्न अरण्य अन्य
ब्रह्माण्ड में प्रसिद्ध हैः यह कहते हैं ।
श्रीरामजी, कहीं पर तो चिदाकाश में शाखाओं के सदृश वृक्षों के मूल दिखाई देते हैं,
इसलिए वज्रमणि के सदृश अत्यन्त दृढ़, पत्र, पुष्प आदि से सुशोभित वृक्षों से युक्त अरण्य
विद्यमान है