Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
तत्र रुद्रसहस्राणि ब्रह्मकोटिशतानि च ।
दृष्टानि विष्णुलक्षाणि कल्पवृन्दान्यलं मया ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार जगत् की प्रासंगिक परस्पर शून्यता का वर्णन कर अब प्रस्तुत विषय कहते हैं /
हे श्रीरामचन्द्रजी, उन ब्रह्माण्डों में मैंने हजारों रुद्र, सैकड़ों-करोड़ ब्रह्मा, लाखों विष्णु
ओर असंख्य कल्प देखे