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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

न विचेतन्ति कल्पान्तान्सर्वाण्येवपरस्परम् । एकमन्दिरसंसुप्ताः स्वप्ने रणरयानिव ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

भद्र, उन वर्णित जगता में एक दुसरे के भीतर इस तरह के कल्पान्तकाल प्रवृत्त हुए रहते हैं, परन्तु वे सभी जगत्‌ एक दूसरे में प्रवृत्त कल्पान्तों को उस तरह नहीं जान पाते, जिस तरह एक मकान में सोये हुए पुरुष स्वप्न में एक दुसरे के रणशब्द को