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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 3

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

मनो महामयोत्तप्तं क्षुब्धमज्ञानवृत्तिषु । मामुद्धर दुरन्तेहं मोहादहमिति स्थितात् ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

हे भगवन्‌, मैं मन के महाभयंकर रोग काम से पीडित हूँ, अज्ञान की वृत्तियों दुर्वासनाओं से क्षुब्ध हूँ । मेरे समस्त कर्म दुरुच्छेद्य हैँ । अतः अनात्मा में आत्माभिमानाकार से स्थित मोह से मेरा शीघ्र उद्धार कीजिये