Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
इदं गुणावहं नेदमिति मुक्त्वा विकल्पनम् ।
रूपमात्रानुसारित्वादवस्तुन्यपि धावति ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
स्त्री के शरीर के यह वस्त्र, आभूषण सिन्दूर आदि ही
सौन्दर्य उत्पन्न करनेवाले है, रक्त-मांस आदि नहीं, इस तरह के विवेचन के बिना ही एकमात्र
रूप के पीछे-पीछे दौड़ने का स्वभाव होने के कारण नेत्र अवस्तु में भी दौड़ जाता है