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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 36

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

मिथश्चान्यान्यशास्त्राणि मिथोऽनन्तानि यानि च । अन्योन्यसन्निवेशानि मिथोऽन्योन्यानि यानि च ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

कुछ सर्ग ऐसे थे, जिनमें दूसरे से मेल न (४0) एक पदार्थवादी आदियों के मतों से कहा गया है । खानेवाले भिन्न-भिन्न शास्त्र थे, कुछ परस्पर अनन्त अवयव एक-से थे, कुछ का स्मरण होने पर एक दूसरे एकरूप ही मालूम होते थे