Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
तथा मीलितसर्गाणि एकनाथावृतानि च ।
विलक्षणप्रजेशांशविचित्राचारवन्ति च ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
कुछ सर्ग तो सुषुप्ति और प्रलयों से ही
भरपूर थे यानी सुषुप्ति-प्रलयमय थे, किन्हीं में केवल हिरण्यगर्भ ही विराजमान थे और कुछ में
प्रजापति और उनके अंशभूत देवताओं का चित्र-विचित्र आचरण देखते ही बनता था