Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
त्वादृशानुभवाभोगविरुद्धातिदशानि तु ।
तथा नित्यान्धकाराणि सूर्यादिरहितानि च ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
सिद्ध. विद्याधर आदि की जो चित्र-विचित्र कल्पनाएँ हैं; उनकी तो मनुष्य बुद्धि से सभावनाशरी
नहीं हो सकती, उस्र आशय से कहते हैं /
भद्र, कुछ तो मैंने ऐसे सूक्ष्म चित्र-विचित्र परिणामवाले भूतों से युक्त संसार देखे कि उन
परिणामों की आप अपने अनुभव के विस्तार से संभावना भी नहीं कर सकते । कुछ तो निरन्तर
अन्धकार से व्याप्त और सूर्य आदि से रहित थे