Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 58, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 58, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 58 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
अयमस्ति मम ब्रह्मन्संशयस्तं निवारय ।
किमिदं भगवन्नाम पाषाणाख्यानमुच्यते ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मन्, अब इस विषय में मुझे जो यह सन्देह है, इसका निवारण
कीजिए । भगवन्, यह पाषाणाख्यान किस अंश की समानता लेकर कहा गया है ? व्यावर्तक यानी
भेद के हेतु धर्मों से युक्त पदार्थों का ही साधारण धर्म से सादृश्य माना जाता है, यह प्रसिद्धि है,
अतः सन्देह का होना स्वाभाविक हे