Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 58, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 58, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 58 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
शैलानां नाणुरप्यस्ति स सर्गैर्यो न निर्घनः ।
न च क्वचन विद्यन्ते सर्गा ब्रह्मखमेव तत् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
पर्वतों का भी ऐसा कोई अणु नहीं है, जो सर्गाँ से भरा पड़ा न हो, किन्तु सभी
परमाणु सर्गो से भरे पड़े हैं और उनमें कहीं भी सर्ग वास्तव में नहीं हैं, केवल ब्रह्मरूप ही वे
हैं