Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 58, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 58, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 58 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
न तेजसोऽणुरप्यस्ति सगैर्निर्विवरो न यः ।
न च क्वचन सर्गास्ते सन्ति ब्रह्मखमेव तत् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसा तेज का कोई भी अणु नहीं है, जिसमें सर्गों की स्थिति न हो
और वास्तव में तो कहीं पर भी सर्ग नहीं है, किन्तु सर्गरूप से भासमान सब ब्रह्माकाशमात्र
है