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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

अस्य भागविभागात्मा नाशोऽवश्यमवारितः । बिन्दुना बिन्दुना बोधे उद्धृतस्यास्ति हि क्षयः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

जिसकी महाराज वस्निष्ठजी ने प्रतिज्ञा की है, उसका अब साधन कहते हैं । विचार कर देखने से यह निश्चित होता है कि इस जगत्‌ का विनाश अवश्य होगा, वह पृथिवी आदि अवयवों का विभागस्वरूप है, क्योकि पृथिवी आदि सावयव है, अतः उनके विनाश का कोई प्रतीकार नहीं कर सकता । यही कारण है कि एक-एक बूँद निकाल लेने से घड़े के जल का नाश अवश्य हो जाता है