Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, Verse 42
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
रिक्तं देशादिशब्दार्थैर्देशकालक्रियात्मकम् ।
यथास्थितमिदं तत्र सर्वमस्ति न वास्ति च ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
देश, काल क्रिया आदि शब्दों के अर्थो से यानी प्रवृत्ति निमित्त से (जाति
गुण क्रिया आदि से) रहित तथा देश, काल एवं क्रियामय वह आत्मा है । यथास्थित यह सम्पूर्ण
जगत् अधिष्ठान से उसमें है ओर स्वस्वरूप से नहीं भी है