Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, Verse 1

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । बोधो जगदिवाभाति मुने येन क्रमेण ह । तं क्रमेण क्रमं ब्रूहि भूयो भेदनिवृत्तये ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे मुने, कूटस्थ चिदात्मा जिस क्रम से जगत्‌-सा भासता है, वह क्रम-भेद की निवृत्ति के लिए अन्य वादियों की कल्पनाओं का खण्डनकर अपने मत के समर्थन से फिर किये

सर्ग सन्दर्भ

इक्यावनवाँ सर्ग समाप्त बावनवाँ सर्ग तार्किकं के तर्को से उत्पन्न हुई अनेक प्रकार की कल्पनाओं का खण्डन कर कूटस्थ परमात्मा के अनिवार्च्य जगद्भाव का समर्थन।