Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, Verse 32
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, verse 32 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
परां पेलवतां याता दृश्यलक्ष्म्यः स्थिता अपि ।
स्वप्ना इव परिज्ञाता न स्वदन्ते विवेकिनः ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
दृश्य वस्तुओं की कान्ति जब अत्यन्त तुच्छरूप भासने लग
जाती है, तब उनकी स्थिति होने पर भी विवेकी को वे अच्छी नहीं लगती । क्योकि वह स्वप्न के
सदृश उन्हें मिथ्या ही समञ्जता है