Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 51, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
बोधाबोधनमेवेदं जगच्चित्तमिवोदितम् ।
तदेवास्तं गतं बोधात्पिण्डबन्धस्य कास्तिता ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
इन कव बातों से निष्कर्ष यह निकला कि निथ्याश्रूत जग्रतः चित्त आदि के रूप में मिथ्या
अज्ञान ही नृत्य करता हैं, यह कहते हैं /
साक्षी चेतन के अज्ञान से ही यह जगत् और चित्त उत्पन्न हुआ है, ज्ञान से जब अज्ञान नष्ट
हो गया, तब निर्मल चेतन में जगत् आदि स्वरूपों का अस्तित्व ही क्या रहा ?