Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 50, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 50, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 50 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
ये तु संप्राप्तसंबोधा विश्रान्ताः परमे पदे ।
क्षीणजाग्रत्प्रभृतयस्ते तुर्यां भूमिकां गताः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
सातवीं भ्रूमिका में आरुढ़ हुए पुरुष ही सातवे प्रकार के जीव हैं; यह कहते हैं /
जिन महापुरुषों को ज्ञान प्राप्त हो चुका है और परमपद में विश्रान्ति ले रहे हैं, वे क्षीण
जाग्रत् जीव कहलाते हैं, ये जीव सप्तम भूमिका में स्थित हैं