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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 5, Verse 6

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 5, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 5 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

मुग्धबुद्धिमनात्मज्ञं कं त्वं सुचिरजीवितम् । स्मरसीति मया पृष्टेनोक्तं तेनेदमङ्ग मे ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

मैंने भुशुण्डजी से पूछा था कि हे प्रिय, यह बतलाओ कि इस संसार में मुग्धबुद्धि तथा आत्मज्ञानशून्य दीर्घजीवी तुम किसे स्मरण करते हो ? हे श्रीरामजी, मेरे पूछने पर उन्होने यह कहा