Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
आकाशविशदैश्चित्तैर्भावितैषातिवाहिकैः ।
आधिभौतिकता मिथ्या नटैरिव पिशाचता ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
आकाश के
सदश विशद इन सूक्ष्म चित्तों के द्वारा यह मिथ्या आधिभौतिकरूपता ऐसे भावित हुई है, जैसे कि
पिशाचवेष का अभिनय करने के लिए नटो द्वारा मिथ्या पिशाचरूपता भावित होती है । तात्पर्य यह
कि पिशाचवेष का अभिनय करने के लिए जैसे मिथ्या पिशाचवेष को नट धारण करते हैं वैसे ही इन
चित्तो ने यह मिथ्या भौतिकरूप धारण किया है