Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
आतिवाहिकदेहानां चित्तानामेव जायते ।
आधिभौतिकताबोधो दृढभावनया स्वया ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
जिस मन की भावना से यह सारा दृश्यप्रपंच ढ़ हो जाता है उसी मन की भावना से यह सार
दृश्यप्रपंच शिथिल भी हो जाता हैं, यह कहते हैं ।
मन की दृढ़ भावना से ही चित्तस्वरूप सूक्ष्म शरीरों की स्थूलदशा प्राप्त हो जाती है यानी दृढ़
भावना से ही चित्तरूप लिंग शरीरों मेँ आधिभौतिकरूपता का बोध होता हे