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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, Verse 24

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

एतावतीष्ववस्थासु बोधस्योदेति नान्यता । शब्दकल्पनया भेदः केवलं परिकल्पितः ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

इस तरह के हजारों विवर्तो से भी विति में अणुमात्र भी विकार नहीं आता, क्योकि वे सी नाममात्र के ही रहते हैं; यह कहते हैं । हे श्रीरामचन्द्रजी, इन सभी अवस्थाओं में चिदात्मा अपने स्वरूप से अन्यभाव को तनिक भी प्राप्त नहीं होता । शब्दमात्र की केवल कल्पना से ही भेद ही कल्पना की गई है