Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
पिण्डत्वं नास्ति भूतानां शून्यता च न विद्यते ।
चित्तमप्यत एवास्तं शेषं सत्तन्न चास्थिति ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह संसार में पिण्डत्वादि का खण्डन हो जाने पर साररूप से सन्मात्र ही शेष रह जाता
हैं, यह कहते हैं ।
इन सांसारिक जीवों की कोई पिण्डता नहीं है । वस्तुतः कोई मूर्ति नहीं है और न शून्यता ही
विद्यमान है । यही कारण है कि चित्त भी अस्त हो चुका है और एकमात्र सद्रूप ही शेष रह गया है,
उसका किसी तरह अपलाप नहीं हो सकता वह सदा स्थित है