Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 48, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 48, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 48 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
एवमभ्यासवशतः परे विश्रम्यते पदे ।
निम्नेवाम्भसि शान्तेन स्वयमेव विवेकिना ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
यह कहते हैं /
इस तरह अभ्यास के बल से शान्त विवेकी पुरुष स्वयं ही जल में निम्न (नीचे के) भाग के
सदश परम पद में विश्रान्ति प्राप्त कर लेता है