Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 48, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 48, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 48 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
पूर्वं यथाभिमतपूजनसुप्रसन्नो दत्वा विवेकमिह पावनदूतमात्मा ।
जीवं पदं नयति निर्मलमेकमाद्यं सत्सङ्गशास्त्रपरमार्थपरावबोधैः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
कहे गये प्रश्न-उत्तरों का संक्षेप कर उपसंहार करते हैं /
पूर्व वर्णित शास्त्रविहित पूजन से प्रसन्न हुआ आत्मा परम विवेकरूप परम पवित्र दूत भेजकर
सत्संग, शास्त्र और परमार्थ वस्तु के उत्तम उपदेश द्वारा जीव को अद्वितीय, निर्मल और सर्वोच्च
पद प्राप्त कराता है