Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 47, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 47, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 47 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
कल्लोलविकलाः क्षुब्धसमुद्रपतिता इव ।
नाप्नुवन्ति स्थितिं स्वस्थां विकृताकृतयोऽर्थिनः ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
धन के लोभी जीवों की आकृतियाँ (आकार) विकृत ही रहा करती
है ओर वे अपनी स्वस्थ स्थिति ऐसे प्राप्त नहीं कर सकते, जैसे कि क्षुब्ध समुद्र में गिरे हुए तथा
तरंगों से विकल हो उठे पुरुष