Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 46, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 46, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 46 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
परमार्थैकतामेन्य न जाने क्व मनो गतम् ।
क्व वासना क्व कर्माणि क्व हर्षामर्षसंविदः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
परमार्थ स्वरूपता
को प्राप्त करके तो वह मन न जाने कहाँ चला जाता है। उस समय वासना कहाँ रहती है, कर्म कहाँ
रहते हैं तथा हर्ष और क्रोध आदि की वृत्तियाँ कहाँ रहती हैं इसका कुछ भी पता नहीं चलता