Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 46, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 46, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 46 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
यावन्नाधिगतं ब्रह्म न विश्रान्तं परे पदे ।
तावत्तन्मननत्वेन न ध्यानमवगम्यते ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
कब तक वह ध्यान रुप से अवयत नहीं होता, यह कहते हैं ।
जब तक उसे ब्रह्मज्ञान नहीं होता तथा जब तक वह परम पद में विश्रान्त नहीं हो जाता, तब
तक विषयों के मननरूप से वह मन आत्मध्यानरूप से अवगत नहीं होता