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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 46, Verse 19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 46, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 46 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

अस्ति चेद्भोगवैतृष्ण्यं किमन्यद्ध्यानदुर्धिया । नास्ति चेद्भोगवैतृष्ण्यं किमन्यद्ध्यानदुर्धिया ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

यह जो कुछ का वह सव विषय-वैरग्य से ही हो सकता है, दूसरे किसी प्रकार से नहीं; इसलिए विकय-वैराग्य को दढ करने के लिए कहते हैं / यदि पुरुष में भोगों के प्रति विराग विद्यमान है, तो ध्यानरूप दुःखसाध्य बुद्धि से कौन- सा प्रयोजन सिद्ध होगा ? और यदि विराग नहीं है, तो भी ध्यानात्मक दुःखसाध्य बुद्धि से कौन-सा प्रयोजन सिद्ध होगा ?