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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

हृदयेन्दोर्गलश्रेणी दुःखाब्जतिमिरावलिः । कृष्णायःशृङ्खलातृष्णा दिनानुदिनमुज्झति ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

सद्बुद्धिरूपी चन्द्रमा को निगल जानेवाली अमावस्या की पंक्तिभूत तथा दुःखरूपी चन्द्रमा में अनेकत्व की भ्रान्ति पैदा कर देनेवाली तिमिररोग की पंक्तिरूप लोहे की निर्मित श्रृंखला-सी प्राणियों के बन्धन की हेतु तृष्णा दिन पर दिन (५) इसको छोडती जाती है