Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, Verse 51
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, verse 51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
सत्तासत्ते द्वयैक्ये च निर्णीते नेह केनचित् ।
उपाय एकः शास्त्रार्थो द्वितीयो ज्ञसमागमः ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मस्वरुप में विश्रान्त होने के उपाय बतलाते हैं /
इस आत्मस्वरूप में विश्रान्ति का प्रथम उपाय निरन्तर अध्यात्मशास्त्र का अभ्यास और
दूसरा साधु पुरुषों की संगति है तथा तीसरा उपाय इस निर्वाण में ध्यान है । सज्जनों, इनमें
उत्तरोत्तर उपाय श्रेष्ठ हैं