Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 44, Verse 46
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 44, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
मानसिंहसमुल्लासहृदयोत्कम्पनातुरः ।
मरणेन रणे येन वृकपुष्पमिवेक्षितः ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
मानरूपी सिंह के समुल्लास से इसके हृदय में उत्कम्पन हो रहा है इसकी छाती धडक रही है, ओर
उससे यह आतुर हो गया है तथा प्रसिद्ध मृत्युरूपी व्याघ्र से प्रहार करते समय अगस्त वृक्ष के पुष्प
की नाई सुखपूर्वक विदीर्ण करने योग्य यह दृष्ट है