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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 44, Verse 41

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 44, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 41

संस्कृत श्लोक

इन्द्रियग्राममागत्य प्रपलायनतत्परः । सुदुर्ग्रहगजेन्द्रोग्रविस्फूर्जनविमर्दितः ॥ ४१ ॥

हिन्दी अर्थ

यह इन्द्रियरूपी गाँव में आकर भागने में तत्पर हे । जिसको वश में कर लेना कोई लड़कों का खेल नहीं है एसे कामरूपी गजेन्द्र की भयानक गर्जना से यह मर्दित हो चुका है