Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 44, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 44, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
तृष्णाचारुलताजालप्रवेशवशविक्षतः ।
स्वप्रज्ञारचिताचारः परमायास्वशिक्षितः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
तृष्णारूपी सुन्दर लताओं में छिपते रहने से इसका शरीर
घावयुक्त हो गया है । इसने अपनी बुद्धि से अनेक तरह के आचारो की कल्पना कर रक्खी है हे
श्रीरामचन्द्रजी, यह परमात्मा की माया के विषय में अशिक्षित है