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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, Verse 50

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, verse 50 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 50

संस्कृत श्लोक

विज्ञास्यत्यकृतार्थत्वं क्षणान्तरकदर्थनैः । उपायं कल्पनात्मानमनुपायं विदुर्बुधाः ॥ ५० ॥

हिन्दी अर्थ

इससे कल्पनात्मक ज्ञान मोक्ष का उपाय नहीं है, तत्त्वो के इस अनुभव को लेकर उपसंहार करते हैं । जो काल्पनिक उपाय है वह निमेषभर में ही भाव, अभाव तथा इच्छा भ्रमों से दुःखदायी होने के कारण मोक्ष का उपाय नहीं है, यह तत्त्वज्ञो का मत हे