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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 41, Verse 19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 41, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 41 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

भविष्यन्नवनिर्माणं चेतसीव स्थितं पुरम् । ब्रह्म बृंहितभारूपमभेदीकृतमानसम् ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

भविष्य में जिस नगर का नवीन निर्माण करना होता है, उसका पहले चित्त मेँ ही कल्पनारूप से अस्तित्व रहता है, इस तरह का नगर जैसे चित्तस्वरूप है, वैसे ही सामने स्थित यह जगत्‌ पूर्ण प्रकाशात्मक अपने स्वरूप में ब्रह्मरूप ही है, जिसमें कि मन को एकरस बना दिया गया हे