Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 4, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 4, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 4 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
स्वयत्नमात्रसंसाध्यादसहायादिसाधनात् ।
अनहंवेदनान्नान्यच्छ्रेयः पश्यामि तेऽनघ ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
किसी दूसरे पुरुष आदि बाह्य साधन की अपेक्षा न होने सते भी इसको अतिहुलभ
बतलाते हैं /
हे निष्पाप श्रीरामचन्द्रजी, किसी दूसरे सहायक आदि साधन के बिना स्वयत्नमात्र से साध्य
अनहंभावना के सिवा मैं दूसरा आपका कोई कल्याणकारण नहीं देखता