Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 4, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 4, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 4 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
न ज्ञेयमर्थतोऽस्तीह हेम्नीव कटकादिता ।
भ्रान्तिमात्रादृते सा च शाम्यत्यस्मरणेन ते ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
युक्ति से विचारने पर जैसे सुवर्ण में
कटक आदिरूपता केवल भ्रान्ति को छोडकर कोई भी दूसरी वस्तु नहीं है वैसे ही इस आत्मा
में युक्ति से विचारने पर देहादि ज्ञेय वस्तु भ्रान्ति को छोड़कर दूसरी कोई भी वस्तु नहीं है ।
आपकी वैसी भ्रान्ति केवल विषयों के विस्मरण से ही नष्ट हो जायेगी