Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, Verse 36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
तेनैवाभ्यासयोगेन याति तत्तनुतां तथा ।
यथा नाहं न संसारः शान्तमेवावशिष्यते ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त भूमिका के अभ्यासरूप योग से वह जगत्-जाल ऐसे क्षीणता
को प्राप्त करता है, जैसे कि फिर न अहंकार ओर न संसार ही उत्पन्न हो सकता है, केवल
शान्त ब्रह्म ही अवशिष्ट रह जाता है