Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
मूर्तो यथा स्वसदृशैः करोत्यवयवैः क्रियाः ।
आत्मभूतैस्तथा भूतैश्चिदाकाशमकर्तृ सत् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे अवयवी (घटादि) अपने सदुश
यानी अपने अस्तित्व से अलग अस्तित्व न रखनेवाले अवयवों से ही क्रिया करता है, वैसे ही
स्वरूपभूत पृथ्वी आदि भूतों से ही यानी अपनी सत्ता से अलग सत्ता न रखनेवाले भूतों से ही
चिदाकाश यह सब कुछ करता है, वास्तव में तो वह सत् ओर अकर्ता ही है