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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, Verse 22

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

रूपालोकमनस्कारबुद्धयहन्तादयः परे । स्वरूपभूताः सलिले द्रवत्वमिव खात्मकाः ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

इस तरह प्रत्यगात्सा मे विद्यमान आध्यात्मिक भावों की भी प्रथक्‌ सत्ता नहीं है, इसका अपने में ही सब अनुभव करते हैं; यों कहते हैं / जैसे जल में विद्यमान जलरूप द्रवत्व है, वैसे ही परब्रह्म में विद्यमान बुद्धि अहन्ता आदि विषय जो हैं, वे सब आत्मरूप तथा चिदाकाशस्वरूप ही हैं